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वसंतोत्सव


या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता

या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना

या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवै: सदा वन्दिता

सा मां पातु सरस्वती भगवती नि:शेषजाड्यापहा......




वसंत पंचमी माघ के महीने में आती हैं, इस दिन वसंत ऋतु का प्रारंभ होता हैं। वंसत को ऋतू राज माना जाता हैं यह पूरा माह बहुत शांत एवं संतुलित होता हैं। इन दिनों मुख्य पाँच तत्व (जल, वायु, आकाश, अग्नि एवं धरती ) संतुलित अवस्था में होते हैं और इनका ऐसा व्यवहार प्रकृति को सुंदर एवं मन मोहक बनाता हैं अर्थात इन दिनों ना बारिश होती हैं, ना बहुत ठंडक और ना ही गर्मी का मौसम होता हैं, इसलिए इसे सुहानी ऋतु माना जाता हैं |

यह दिवस हिंदी पंचांग के अनुसार माघ महीने की पंचमी तिथी को मनाया जाता हैं, इस दिन से वसंत ऋतू का प्रारम्भ होता हैं | प्राकृतिक रूप में भी बदलाव महसूस होता है| इस दिन पतझड़ का मौसम खत्म होकर हरियाली का प्रारम्भ होता हैं | अंग्रेजी पंचांग के अनुसार यह दिवस जनवरी – फरवरी माह में मनाया जाता हैं |

वसंत पंचमी उत्सव भारत के पूर्वी क्षेत्र में बड़े उत्साह से मनाया जाता हैं, इसे सरस्वती देवी जयंती के रूप में पूजा जाता हैं, जिसका महत्व पश्चिम बंगाल में अधिक देखने मिलता हैं | बड़े पैमाने पर पुरे देश में सरस्वती पूजा अर्चना एवं दान का आयोजन किया जाता हैं | इस दिन को संगीत एवं विद्या को समर्पित किया गया हैं | माँ सरस्वती सुर एवं विद्या की जननी कही जाती हैं इसलिये इस दिन वाद्य यंत्रो एवं पुस्तकों का भी पूजन किया जाता हैं |

भारत में कई त्यौहार मनाये जाते हैं, जो न केवल एक उत्सव होते हैं, बल्कि पर्यावरण में आने वाले बदलाव के सूचक भी होते हैं | हिंदी पंचाग की तिथीयाँ अपने साथ मौसमी बदलाव का संकेत भी देती हैं जो कि पुर्णतः प्राकृतिक होते हैं | उन्ही त्यौहारों में एक त्यौहार है वसंत पंचमी |


वसंत में सभी जगह हरियाली का दृश्य दिखाई पड़ता हैं | पतझड़ खत्म होते ही पेड़ों पर नयी शाखायें जन्म लेती हैं, जो प्राकृतिक सुन्दरता को और अधिक मनमोहक कर देती हैं | ब्रह्माण्ड की संरचना का कार्य शुरू करते समय ब्रह्मा जी ने मनुष्य को बनाया, लेकिन उनके मन में दुविधा थी उन्हें चारो तरफ सन्नाटा सा महसूस हुआ, तब उन्होंने अपने कमंडल से जल छिडक कर एक देवी को जन्म दिया, जो उनकी मानस पुत्री कह लायी, जिन्हें हम सरस्वती देवी के रूप में जानते हैं, इस देवी का जन्म होने पर इनके हाथ में वीणा, दूसरी में पुस्तक और अन्य में माला थी | उनके जन्म के बाद उनसे वीणा वादन को कहा गया, तब देवी सरस्वती ने जैसे ही स्वर को बिखेरा वैसे ही धरती में कम्पन्न हुआ और मनुष्य को वाणी मिली और धरती का सन्नाटा खत्म हो गया | धरती पर पनपने हर जिव जंतु, वनस्पति एवं जल धार में एक आवाज शुरू हो गई और सब में चेतना का संचार होने लगा | इसलिए इस दिवस को सरस्वती जयंती के रूप में मनाया जाता हैं|


इस दिन मां सरस्वती की पूजा-उपासना करने का विधान है| विद्या और ज्ञान की देवी मां सरस्वती को इस दिन पीले रंग के वस्त्र, पीले पुष्प, पीले रंग का भोग आदि चीजें अर्पित की जाती हैं| इस दिन पीले रंग का भी विशेष महत्व होता है| माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन बसंत पंचमी का पर्व मनाया जाता है|


गजेरा विद्याभवन सचिन हमारी शाला मे हर साल बसंत पंचमी का त्यौहार मनाते हैं। सरस्वती माता की पूजा अर्चना करते हैं । छात्रों की श्लोक स्पर्धा रखते हैं। सरस्वती वंदना करवाते हैं। छात्रों और शिक्षकों को पीले कपड़े पहन के आने के लिए कहते हैं। इस बार हमने वसंतपंचमी उत्सव ऑनलाइन मनाया और छात्रों ने पीले रंग के कपडे पहने।उत्सव की शुरुआत सरस्वती वंदना से की। हमारे प्रिंसिपल मिस्टर नितिन पाटिल ने छात्रों को बताया की ये वसंत पंचमी क्यो मनाया जाता और केसे मानते है। वाइस प्रिंसिपल अंजू मैम ने छात्रों को हर रोज सरस्वती माता के मन्त्र का उच्चारण करने के लिए कहा और इन्होंने वसंत पंचमी के बारे में बहुत सारी जानकारी दी और बच्चों ने अच्छी तरह से समझी। इस तरह से हमने वसंत पंचमी मनाई़......



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